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प्रमाणित अधिवक्ता · उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019

उपभोक्ता कोर्ट क्लेम फाइलिंग आपके शहर में — रिफंड, खराब सामान और सेवा विवाद।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत शिकायत तैयार करना, दाखिल करना और पैरवी — रिफंड, खराब उत्पाद, सेवा में कमी, ऑनलाइन शॉपिंग और बिल्डर विवाद, भारत जिला व राज्य आयोग में प्रमाणित अधिवक्ताओं द्वारा।

उपभोक्ता संरक्षण — रिफंड, खराब सामान, सेवा में कमी

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  • ₹5 लाख तक
    कोई कोर्ट फीस नहीं
  • अधिवक्ता
    द्वारा ड्राफ्टिंग
  • ई-दाखिल
    ऑनलाइन फाइलिंग
  • अपडेट
    WhatsApp पर स्थिति
उपभोक्ता शिकायत फॉर्म, खराब उत्पाद, न्याय का तराजू और गेवल
₹5 लाख तक के दावे पर
शून्य शुल्क
निःशुल्क
केस आकलन
अधिवक्ता
नोटिस ड्राफ्टिंग
ई-दाखिल
ऑनलाइन फाइलिंग
सुनवाई
में प्रतिनिधित्व

हम आपके लिए क्या करते हैं

निःशुल्क केस आकलन

फाइल करने से पहले 30 मिनट में आपकी शिकायत, साक्ष्य और कानूनी आधार की WhatsApp/ऑडियो समीक्षा।

विपक्षी को नोटिस

अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी मांग नोटिस — अनेक मामले इसी चरण पर कोर्ट जाने से पहले सुलझ जाते हैं।

शिकायत की ड्राफ्टिंग

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 34–37 के तहत पूरी शिकायत — मुआवज़ा, रिफंड और मुकदमा व्यय की प्रार्थना सहित।

ई-दाखिल ऑनलाइन फाइलिंग

उपयुक्त आयोग में ई-दाखिल पोर्टल से फाइलिंग (जिला ₹50 लाख तक, राज्य ₹2 करोड़ तक, राष्ट्रीय उससे अधिक)।

सुनवाई में प्रतिनिधित्व

हर सुनवाई में आपके लिए अधिवक्ता उपस्थित। आपको केवल तब आना होता है जब आयोग विशेष रूप से कहे।

आदेश का निष्पादन व वसूली

आदेश के बाद मुआवज़ा और व्यय वसूलने की कार्यवाही — क्योंकि जीतना आधा काम है।

यह कैसे काम करता है

  1. 01

    निःशुल्क आकलन

    WhatsApp पर साक्ष्य भेजें — बिल, वारंटी, चैट, फोटो। हम बताते हैं केस बनता है या नहीं।

    उसी दिन

  2. 02

    कानूनी नोटिस

    अधिवक्ता-हस्ताक्षरित नोटिस RPAD और ईमेल से। 15–30 दिन का उत्तर समय।

    सप्ताह 1

  3. 03

    शिकायत दाखिल

    समाधान न होने पर सही आयोग में ई-दाखिल से शिकायत दर्ज।

    सप्ताह 2–4

  4. 04

    सुनवाई व आदेश

    हर सुनवाई में अधिवक्ता उपस्थित। सामान्यतः 6–18 माह में आदेश।

    प्रक्रिया जारी

पारदर्शी कीमत

निश्चित अधिवक्ता शुल्क, पहले ही तय। ₹5 लाख तक के दावे पर उपभोक्ता आयोग कोई फीस नहीं लेता। आपके मुआवज़े पर हमारा कोई कमीशन नहीं।

कानूनी नोटिस
मुकदमे से पहले मांग
₹2,500
  • अधिवक्ता ड्राफ्टिंग
  • RPAD प्रेषण
  • ईमेल प्रति
  • 30 दिन ट्रैकिंग
जिला आयोग
₹50 लाख तक के दावे
₹9,500
  • शिकायत ड्राफ्टिंग
  • ई-दाखिल फाइलिंग
  • 3 सुनवाई शामिल
  • आदेश की प्रति
राज्य आयोग
₹50 लाख – ₹2 करोड़
₹18,000
  • विस्तृत वादपत्र
  • फाइलिंग + सुनवाई
  • लिखित तर्क
  • आदेश निष्पादन
अपील / पुनरीक्षण
उच्च फोरम
₹15,000
  • अपील ड्राफ्टिंग
  • नए वादपत्र
  • 3 सुनवाई
  • निर्णय प्रति

हम हर सप्ताह जिन शिकायतों पर काम करते हैं

फ्लैट कब्ज़े में देरी

पजेशन में देरी

एग्रीमेंट की तिथि के बाद भी बिल्डर ने कब्ज़ा नहीं दिया — रिफंड, ब्याज और मानसिक कष्ट के मुआवज़े का दावा।

खराब उत्पाद / वारंटी

वारंटी नकार

मोबाइल, TV, उपकरण, कार — कंपनी ने वारंटी में बदलने या मरम्मत से इनकार किया। रिफंड + हर्जाना।

ऑनलाइन शॉपिंग विवाद

ई-कॉमर्स

गलत सामान, रास्ते में टूटा, नकली उत्पाद, रिफंड न मिलना — Amazon, Flipkart, Meesho व क्विक-कॉमर्स के दावे।

इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट

बीमा दावा

स्वास्थ्य, वाहन या संपत्ति बीमा का दावा गलत तरीके से खारिज — पूरी बीमा राशि + ब्याज + व्यय का दावा।

मेडिकल लापरवाही

चिकित्सा लापरवाही

अस्पताल या क्लिनिक की लापरवाही से चोट, अतिरिक्त खर्च या क्षति — मुआवज़ा और शुल्क वापसी।

फ्लाइट / यात्रा विवाद

यात्रा शिकायत

रद्द उड़ान, खोया सामान, होटल की गलत जानकारी — रिफंड और सेवा में कमी का मुआवज़ा।

उपभोक्ता मामलों के लिए मंगल हैंड्स क्यों

ईमानदार केस आकलन

केस कमज़ोर हो तो हम पहले ही बता देते हैं — जहाँ परिणाम की संभावना नहीं, वहाँ फीस के लिए फाइल नहीं करते।

निश्चित शुल्क, कोई कमीशन नहीं

जीता हुआ पूरा मुआवज़ा आपका। आदेश की राशि में हमारा कोई प्रतिशत नहीं।

अधिवक्ता-हस्ताक्षरित ड्राफ्टिंग

हर नोटिस और शिकायत प्रैक्टिसिंग, बार-पंजीकृत अधिवक्ता द्वारा तैयार व हस्ताक्षरित — कोई टेम्पलेट नहीं।

WhatsApp पर अपडेट

हर सुनवाई का परिणाम और अगली तिथि 24 घंटे में WhatsApp पर — वकील के पीछे भागने की ज़रूरत नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मुझे स्वयं कोर्ट जाना पड़ेगा?

बहुत कम। वकालतनामा के आधार पर आपका अधिवक्ता हर सुनवाई में उपस्थित रहता है। कुछ विवादित मामलों में जिरह के लिए आयोग आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति मांग सकता है — ऐसी स्थिति में हम आपको पूरी तैयारी कराते हैं।

उपभोक्ता मामले में कितना समय लगता है?

अधिनियम के अनुसार स्वीकृति के 90 दिन में निपटारा (विशेषज्ञ साक्ष्य होने पर 150 दिन) होना चाहिए। व्यवहार में जिला आयोग औसतन 8–18 माह और राज्य आयोग 12–24 माह लेते हैं। हम शीघ्र सुनवाई का प्रयास करते हैं।

मैं कितना मुआवज़ा मांग सकता हूँ?

भुगतान की गई राशि की वापसी, सामान का प्रतिस्थापन, सेवा मुआवज़ा, मानसिक कष्ट का हर्जाना (सामान्यतः ₹25,000 – ₹5 लाख), भुगतान राशि पर ब्याज और मुकदमा व्यय। अंतिम राशि साक्ष्य के आधार पर आयोग तय करता है।

कोर्ट फीस लगती है?

₹5 लाख तक के दावे पर शून्य कोर्ट फीस। इससे अधिक पर छोटी सी फीस (₹200 से कुछ हज़ार तक)। यह अधिवक्ता शुल्क से अलग है और फाइलिंग के समय जमा होती है।

फाइल करने के लिए कौन-कौन से साक्ष्य चाहिए?

बिल या इनवॉइस, वारंटी कार्ड, डिलीवरी की फोटो, विक्रेता से हुई सभी WhatsApp/ईमेल बातचीत, खराबी का वीडियो और नुकसान का प्रमाण। कागज़ी रिकॉर्ड जितना मजबूत, समाधान उतना तेज़।

क्या NRI आपके शहर में उपभोक्ता शिकायत दर्ज करा सकते हैं?

हाँ। विधिवत नोटरीकृत पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर अधिवक्ता के माध्यम से फाइलिंग हो सकती है। सभी सुनवाई हम संभालते हैं; अपडेट WhatsApp और ईमेल पर मिलते हैं।

यदि विपक्षी आदेश का पालन न करे?

हम निष्पादन (execution) आवेदन दाखिल करते हैं। पालन न होने पर आयोग संपत्ति कुर्की, गिरफ्तारी और कारावास तक का आदेश दे सकता है। आपका अधिवक्ता वास्तविक समय-सीमा पहले ही स्पष्ट कर देता है।

क्या सरकारी विभाग या PSU के विरुद्ध शिकायत हो सकती है?

हाँ — बिजली विभाग, गैस कंपनी, रेलवे, सरकारी बैंक और नगरीय सेवाएं सभी अधिनियम की 'सेवा' परिभाषा में आती हैं। ऐसे मामले हम नियमित रूप से देखते हैं।

जब आप तैयार हों, हम हाज़िर हैं।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत शिकायत तैयार करना, दाखिल करना और पैरवी — रिफंड, खराब उत्पाद, सेवा में कमी, ऑनलाइन शॉपिंग और बिल्डर विवाद, भारत जिला व राज्य आयोग में प्रमाणित अधिवक्ताओं द्वारा।

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